Mukesh Malviya 's Blog

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It is a game not a show

Sep, 09 '09 Subject: Please keep originality, Viewed by: 96
२०-२० क्रिकेट बहुत लोकप्रिय है लेकिन इसका ये मतलब नहीं के इसकी रोचकता को देखकर पूरे क्रिकेट को ही बदल दिया जाये. अरे भाई क्रिकेट की कलात्मकता उसके ५०-५० तथा टेस्ट मैच में ही है. इनमे ही खेल और खिलाडी की भी असली पहचान होती है. २०-२० में आपको आकर सिर्फ रन बनाना है इसमें न कुछ खास रणनीति की जरुरत है और न ही अच्छे खिलाडी होने की. फटाफट आओ दो चार शोट मरो और पवेलियन लौट जाओ. इसमें तो कोई नौसिखिया भी खेल लेगा. जहां तक वन डे को बदलने की बात है ये बिलकुल सही नहीं है. एक बार बेटिंग में सफल नहीं हुए तो दूसरी बार में अच्छे से खेल लो क्या किस्मत के भरोसे क्रिकेट खेलोगे क्या. कुछ अपना परफॉर्मेंस दिखोएगे या नहीं. दर्शको को दो बार अपने पसंदीदा बैट्समैन या बोलर का खेल देखने को मिलेगा. जहां तक दर्शको के इंटेरेस्ट का सवाल है उसके लिए वो २०-२० या आईपील देखेगा. कम से कम क्रिकेट के वास्तविक रूप को मत खराब करो.
 
Tags: No need to change
 
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सुरक्षा के नाम पर भेदभाव

Sep, 01 '09 Subject: Pride of India, Viewed by: 136
अमेरिका खुद को सुप्रीम मानता हैं. दुसरे देशो के प्रति उसका नजरिया सही नहीं हैं. किसी देश को विकसित होते हुए वो नहीं देख सकता. किसी भी तरह वो उस देश को या देश के लोगो को नीचा दिखाने की कोशिश करता है. भारत से उसे शुरू से ही खतरा नजर आता है इसलिए भारत के प्रति कभी भी उसका रवैय्या सही नहीं रहा. हमारे देश के सम्मानीय राष्ट्रपति श्री अबुल कलाम जी की चेकिंग यही बताती है की हमारे देश का सुप्रीम उनके लिए आम आदमी है. अमेरिका के किसी राजदूत या राष्ट्रपति की अपने यहाँ चेकिंग करवाकर देखिये कितना हंगामा होता है. ऐसा माहौल बनाया जाता है जैसे के हमने पूरी दुनिया के मालिक की चेकिंग करवा ली हो. अम्बिका सोनी या शाहरुख खान या कोई भी सम्मानीय व्यक्ति जिन्हें पूरी दुनिया जानती है उन्हें किसी आंतकवादी की तरह एअरपोर्ट पर चेक करना बिलकुल गलत है लेकिन क्या पता हमारी सरकार को शायद ये बेईज्ज़ती अच्छी लगती है या ना जाने कोनसे बोझ तले हमरी सरकार दबी हुई है. क्या अमेरिका का विरोध करके हम हमारा देश नहीं चला सकते. अरे जरा उत्तरी कोरिया जैसे छोटे से देश से शिक्षा ले लो. अपनी इज्जत के लिए वो सर कटा सकता है लेकिन सर झुकाता कभी नहीं.

उनसे कहदो के वो सूरज है तो होंगे, हम जुगनू है फिर भी खुद की चमक रखते है, हमें कमजोर ना समझना ऐ बुरबक हम दुनिया को बदलने की ताकत रखते है.
 
Tags: I proud to be an Indian
 
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भाजपा से जसवंत सिंह का निष्कासन

Aug, 25 '09 Subject: Jaswant singh's book, Viewed by: 164
जसवंत सिंह ने अपनी नई किताब में जिन्ना के बारे में और सरदार वल्लभ भाई पटेल के बारे में जो भी लिखा वो उनका निजी नजरिया है. लेकिन सार्वजानिक रूप से जुड़े हुआ व्यक्ति जो भी कहता है या लिखता है उसका असर बहुत व्यापक होता है. बहुत लोगो की राय और दृष्टिकोण उन पर निर्भर करता है. ऐसे लोगो को सार्वजनिक बयान देने से पहले ये सोचना चाहिए के देश के लोग इस बारे में क्या सोचते है और उनकी प्रतिक्रिया क्या होगी. लोगो की भावनाए धार्मिक और जातीवाद से जुडी होती है. पार्टी भी ऐसे लोगो के साथ नरमी क्यों करेगी जिससे उनकी पार्टी की चाबी ख़राब हो. जसवंत सिंग को पार्टी से निकालने के बाद उन्होंने पार्टी के दुसरे नेताओ के बारे में टिपण्णी करना शुरू कर दिया. ये बाते उनके अंदर पार्टी के लिए रेस्पेक्ट न होना दर्शाती है. वो सोचते है मैं पार्टी में नहीं हू तो पार्टी भी सही कैसे चल सकती है. ऐसे लोगो का निष्कासन पार्टी के और देश के हित में ही है. रही बात इनके निजी व्यू की तो इनकी जिंदगी सार्वजानिक रूप से जुडी है इनकी कोई भी राय निजी कैसे हो सकती है. आडवानी ने भी ऐसे क्या था लेकिन बाद में किसी भी तरह की कोई गलती नहीं की और उसमे सुधार किया ताकि पार्टी तथा देश में शांति बनी रहे. राष्ट्रीय नेताओ को अपनी जिम्मेदारी समझाना चाहिए तभी ये देश ठीक से चल पायेगा.
 
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Male, 30
Indore
India